







फरवरी 2019 में कश्मीर के पुलवामा में हुआ आतंकी हमला भारत पर हुए सबसे भीषण आतंकी हमलों में से एक था, जिसमें चालीस भारतीय सैनिक शहीद हो गए। लेकिन जब एन.आई.ए. ने बम धमाके की जाँच शुरू की तो उन्हें कोई सुराग नहीं मिल रहा था। इस दुस्साहसी हमले के असली मास्टरमाइंड कौन थे? इसका पता लगाना असंभव सा लग रहा था। रोमांचकारी और गहन जानकारी से भरी इस पुस्तक में पुरस्कृत लेखक और पत्रकार राहुल पंडिता बताते हैं कि अपराध की जानकारी जुटाने में माहिर एन.आई.ए. टीम ने किस प्रकार एक-एक कर सारी पहेलियों को सुलझाया। तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के दौरान नजरबंद किए गए एक उपद्रवी, मुठभेड़ में मारे गए एक आतंकवादी के वासनापूर्ण संदेशों से भरे मोबाइल फोन और खुद पुलवामा हमले के बीच की कडिय़ों को जोडऩे में सफलता प्राप्त की। यह पुस्तक कश्मीर और हाल के दिनों में आतंकवाद पर लिखी गई सबसे महत्त्वपूर्ण कृतियों में से एक है, जिसमें पुलवामा केस, उसके प्रतिकार स्वरूप हुए बालाकोट अटैक और आतंकी समूहों की रहस्यमय दुनिया के बारे में ऐसी जानकारी है, जो पहले कभी प्रकाशित नहीं हुई।
| Dimensions | 20.32 x 12.7 x 1.27 cm |
| Isbn 10 | 9355214634 |
| Isbn 13 | 978-9355214638 |
| Item Weight | 200 g |
| Language | Hindi |
| Print Length | 186 pages |
| Publication Date | 17 Jan. 2023 |
| Publisher | Prabhat Prakashan |
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Great
Brilliant research
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Nice book
Must purchase and read
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Very good book everyone should read it
It's also a good reply to those who said pulwama attacked plan by Modi government for taking benefits in 2019 general election
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Mystery solved , must know every Indian.
This book gives the step by step enquiry details how the very complicated conspiracy of Pulwama attack solved. Very interesting and knowledgeable book based upon facts.
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Poor translation and binding quality
Prabhat publication is one of the worst publication in the industry.Very poor translation and the binding quality is also very pathetic.
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